हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, इस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस्लामी गणराज्य ईरान ने दो बार वार्ता का रास्ता आजमाया, लेकिन दोनों बार अमेरिका ने इज़राइल की मिलीभगत से वार्ता के दौरान ही ईरान पर हमला कर दिया। बयान में इसे 'वार्ता की मेज पर बमबारी' करार दिया गया है और कहा गया है कि इससे साबित हो गया कि अमेरिका कभी भरोसेमंद नहीं था और न ही है।
विज्ञप्ति में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ कठोर शब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें 'बाल-दुराचारी और अपराधी' बताया गया है। साथ ही, यह चेतावनी दी गई है कि अमेरिका इस समय वार्ता का मुद्दा उठाकर ईरान के भीतर फूट डालने, लोगों में निराशा फैलाने और इज़राइल के सहयोग से सैन्य कार्रवाई के लिए समय हासिल करने की साजिश कर रहा है।
विज्ञप्ति के मुख्य बिंदु:
- वार्ता से इनकार: संगठन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में अमेरिका के साथ कोई वार्ता नहीं हो रही है। अमेरिकी पक्ष द्वारा जो चर्चाएं की जा रही हैं, वे केवल पड़ोसी देशों के माध्यम से भेजे गए संदेशों पर आधारित हैं और इसे वार्ता प्रक्रिया नहीं माना जा सकता।
- अमेरिकी उद्देश्य: बयान में कहा गया है कि अमेरिका वार्ता का मुद्दा उठाकर तीन मुख्य उद्देश्यों को अंजाम देना चाहता है:
- क्रांतिकारी जनता में निराशा पैदा करना और मैदान में उनकी उपस्थिति को कमजोर करना।
- 'वार्ता हाँ, युद्ध नहीं' जैसी कृत्रिम दुविधा पैदा करके राजनीतिक धाराओं के बीच मतभेद बढ़ाना।
- इज़राइल की मिलीभगत से संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए ईरान को भ्रम और असावधानी की स्थिति में रखना।
- जनता को संदेश: विज्ञप्ति में मांग की गई है कि मौलवियों, सांस्कृतिक और मीडिया कार्यकर्ताओं को जनता को यह समझाना चाहिए कि जब तक ईरान की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक कोई वार्ता नहीं होगी।
बयान के अंत में दावा किया गया है कि जनता, अधिकारी और सशस्त्र बल पूरी ताकत के साथ मैदान में मौजूद हैं और दुश्मन को हराकर ही दम लेंगे।
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